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आइये, जाने, समझें और जुडें अपने पहाड़ से, अपने उत्तराखण्ड से, अपने अल्मोड़ा से . . .

अल्मोड़ा एक नज़र . . .


"अल्मोड़ा भारतीय राज्य अल्मोड़ा जिला का मुख्यालय है। अल्मोड़ा अपनी सांस्कृतिक विरासत, हस्तकला, खानपान, और वन्य जीवन के लिए प्रसिद्ध है।
हल्द्वानी, काठगोदाम और नैनीताल से नियमित बसें अल्मोड़ा जाने के लिए चलती हैं। ये सभी बसे भुवाली होकर जाती हैं। भुवाली से अल्मोड़ा जाने के लिए रामगढ़, मुक्तेश्वर वाला मार्ग भी है। परन्तु अधिकांश लोग गरमपानी के मार्ग से जाना ही अदिक उत्तम समझते हैं। क्योंकि यह मार्ग काफी सुन्दर तथा नजदीकी मार्ग है।भुवाली, हल्द्वानी से ४० कि.मी. काठगोदाम से ३५ कि.मी. और नैनीताल से ११ कि.मी. की दूरी पर स्थित है। तथा भुवाली से अल्मोड़ा ५५ कि.मी. की दूरी पर बसा हुआ है।"

बुधवार, 25 मई 2011

अल्मोड़ा में गली मोहल्ले

मेरे प्यारे मित्रो चलियें आज अल्मोड़ा में आपको स्थानीय गली मौहल्लो में ले चलें . . .
सर्वप्रथम में अपने निवास स्थान से शुरु करना चाहूँगा जो की कुमाऊँ विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के काफी समीप है . . .
न्यू इन्द्रा कॉलोनी - जिस मोहल्ले में मै रहता हूँ उसका नाम है "न्यू इन्द्रा कॉलोनी" जो की खत्याड़ी के ग्रामीण क्षेत्र के अंतर्गत आती है लगभग २०० से २५० मवासे रहते है यहाँ पर . . .


खासियत - आईएं बताएं आपको क्या खासियत है है यहाँ की . . .

- यहाँ पर सभी निवासी लगभग ९५ % पहाड़ी ही है और अन्य कुछ तराई इलाको से है . . .
- पास में ही विश्वविद्यालय का बनाया हुआ एक सुंदर सा खेल का मैदान बना हुआ है . . .
- खेल मैदान के बीचो बीच पानी का प्राकर्तिक श्रोत बना हुआ है यहाँ के ज्यादातर स्थानीय लोग यही पानी पीने के लियें प्रयोग करतें है . . .
- स्थानीय त्योहारों में आपसी हर्षौल्लास देखतें ही बनता है जिससें की आपस में मेलजोल बना रहता है . . .
- खासकर दीपावली और होली पर तो माहौल अति आनंदमय होता है सब लोग मस्ती में डूबें  रहतें है . . .


दिक्कतें - और क्या क्या दिक्कतें है यहाँ पर . . .

- सर्वप्रथम जो की मुझे लगता है वो यहाँ की सबसे अहम् दिक्कतों में से एक है वो है रद्दी कूड़ा करकट जिसको की आप गन्दगी कह सकतें है  जिसकी वजह से मेरा जी बहुत घबराता है की कही अपना सुंदर सा खेल का मैदान रद्दी कूड़े का मैदान ना बन जाएँ . . .
- हाँ और कुछ गन्दगी से सम्बंधित एक और समस्या है यहाँ पर सीवर लाइन ( sewer line ) तो है ही नहीं यह एक बड़ी समस्या है आज तक इस समस्या का हल नहीं निकाला जा सका है अकसर बरसात के दिनों में यहाँ पर काफी ज्यादा दिक्कतों से होकर के गुजरना पड़ता है . . .
- पानी का कम आना भी एक समस्या है यहाँ पर वो तो प्रकृति मेहरबान है जरा सा यहाँ के स्थानीय निवासियों पर जो की पीने का पानी तो श्रोत के पानी से काम चल जाता है अभी तो फिर भी काफी हद तक समस्या हल हुई है थोड़ी बहुत तो आ ही जाता है पानी . . .

बाकीं और भी बहुत सी ख़ास और दिक्कतों से जुडी ही बातें है यहाँ से आप ऐसे ही उत्साहवर्धन करते रहियें आपको अपने शहर के बारें में ज्यादा से ज्यादा अवगत कराना ही मेरा लक्ष्य है . . .
आपसे अनुरोध है आप भी अपने मोहल्लें के बारें में कुछ लिखें जहा पर आप रहते है . . .
इससें हमारी जानकारी में काफी इजाफा होगा . . . धन्यवाद 

1 टिप्पणी:

इतिहास

प्राचीन अल्मोड़ा कस्बा, अपनी स्थापना से पहले कत्यूरी राजा बैचल्देओ के अधीन था। उस राजा ने अपनी धरती का एक बड़ा भाग एक गुजराती ब्राह्मण श्री चांद तिवारी को दान दे दिया। बाद में जब बारामण्डल चांद साम्राज्य का गठन हुआ, तब कल्याण चंद द्वारा १५६८ में अल्मोड़ा कस्बे की स्थापना इस केन्द्रीय स्थान पर की गई। कल्याण चंद द्वारा चंद राजाओं के समय मे इसे राजपुर कहा जाता था। 'राजपुर' नाम का बहुत सी प्राचीन ताँबे की प्लेटों पर भी उल्लेख मिला है।

६० के दशक में बागेश्वर जिले और चम्पावत जिले नहीं बनें थे और अल्मोड़ा जिले के ही भाग थे।

भूगोल

अल्मोड़ा कस्बा पहाड़ पर घोड़े की काठीनुमा आकार के रिज पर बसा हुआ है। रिज के पूर्वी भाग को तालिफत और पश्चिमी भाग को सेलिफत के नाम से जाना जाता है। यहाँ का स्थानीय बाज़ार रिज की चोटी पर स्थित है जहाँ पर तालिफत और सेलिफत संयुक्त रूप से समाप्त होते हैं।

बाज़ार २.०१ किमी लम्बा है और पत्थर की पटियों से से ढका हुआ है। जहाँ पर अभी छावनी है, वह स्थान पहले लालमंडी नाम से जाना जाता था। वर्तमान में जहाँ पर कलक्टरी स्थित है, वहाँ पर चंद राजाओं का 'मल्ला महल' स्थित था। वर्तमान में जहाँ पर जिला अस्पताल है, वहाँ पर चंद राजाओं का 'तल्ला महल' हुआ करता था।

सिमलखेत नामक एक ग्राम अल्मोड़ा और चमोली की सीमा पर स्थित है। इस ग्राम के लोग कुमाँऊनी और गढ़वाली दोनो भाषाएँ बोल सकते हैं। पहाड़ की चोटी पर एक मंदिर है, भैरव गढ़ी।

गोरी नदी अल्मोड़ा जिले से होकर बहती है।


अल्मोड़ा जिले का खत्याड़ी कस्बा

अल्मोड़ा में एक प्रसिद्ध नृत्य अकादमी है, डांसीउस - जहाँ बहुत से भारतीय और फ्रांसीसी नर्तकों को प्रक्षिक्षण दिया गया था। इसकी स्थापना उदय शंकर द्वारा १९३८ में की गई थी। अल्मोड़ा नृत्य अकादमी को कस्बे के बाहर रानीधारा नामक स्थान पर गृहीत किया गया। इस स्थान पर से हिमालय और पूरे अल्मोड़ा कस्बे का शानदार दृश्य दिखाई देता है।

"इन पहाड़ों पर, प्रकृति के आतिथ्य के आगे मनुष्य द्वारा कुछ भी किया जाना बहुत छोटा हो जाता है। यहाँ हिमालय की मनमोहक सुंदरता, प्राणपोषक मौसम, और आरामदायक हरियाली जो आपके चारों ओर होती है, के बाद किसी और चीज़ की इच्छा नहीं रह जाती। मैं बड़े आश्चर्य के साथ ये सोचता हूँ की क्या विश्व में कोई और ऐसा स्थान है जो यहाँ की दृश्यावली और मौसम की बराबरी भी कर सकता है, इसे पछाड़ना तो दूर की बात है। यहाँ अल्मोड़ा में तीन सप्ताह रहने के बात मैं पहले से अधिक आश्चर्यचकित हूँ की हमारे देश के लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए यूरोप क्यों जाते है।" - महात्मा गांधी

२००१ की भारतीय जनगणना के अनुसार, अल्मोड़ा जिले की जनसंख्या ६,३०,५६७ है।

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