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आइये, जाने, समझें और जुडें अपने पहाड़ से, अपने उत्तराखण्ड से, अपने अल्मोड़ा से . . .

अल्मोड़ा एक नज़र . . .


"अल्मोड़ा भारतीय राज्य अल्मोड़ा जिला का मुख्यालय है। अल्मोड़ा अपनी सांस्कृतिक विरासत, हस्तकला, खानपान, और वन्य जीवन के लिए प्रसिद्ध है।
हल्द्वानी, काठगोदाम और नैनीताल से नियमित बसें अल्मोड़ा जाने के लिए चलती हैं। ये सभी बसे भुवाली होकर जाती हैं। भुवाली से अल्मोड़ा जाने के लिए रामगढ़, मुक्तेश्वर वाला मार्ग भी है। परन्तु अधिकांश लोग गरमपानी के मार्ग से जाना ही अदिक उत्तम समझते हैं। क्योंकि यह मार्ग काफी सुन्दर तथा नजदीकी मार्ग है।भुवाली, हल्द्वानी से ४० कि.मी. काठगोदाम से ३५ कि.मी. और नैनीताल से ११ कि.मी. की दूरी पर स्थित है। तथा भुवाली से अल्मोड़ा ५५ कि.मी. की दूरी पर बसा हुआ है।"

शुक्रवार, 20 मई 2011

कौसानी सुमित्रा नंदन पन्त जी के सपनो का संसार . . .


चलियें आज आपको अल्मोड़ा में कुछ दूरी पर स्तिथ एक सुंदर सी जगह (कौसानी) लियें चलतें है | . ..
क्या पता आपको भी प्रकृति से प्रेम हो जाए | . . .
कौसानी (कौसानी यानी भारत का स्विट्जरलैंड।)
Photos of Kausani Best Inn, Kausani

कौसानी उत्तराखंड का एक पर्यटक स्थल है| यह अल्मोड़े से ५३ की: मी: की  दूरी पर अल्मोड़ा बागेश्वर मोटर मार्ग पर स्थित है| कौसानी समुन्द्र ताल से १८९० मी:  की ऊंचाई पर है| यहाँ से ३५० की:मी: चौड़ी हिमालय पर्वत श्रंखला दिखाई देती है| उत्तराखंड में बहुत कम जगहों से ऐसे नज़ारे देखने को मिलते हैं| यहाँ से नंदा देवी, नंदाकोट, पंच्सुली, कमेट आदि कई जगप्रसिद्ध चोटियाँ  एक साथ दिखाई देती हैं| कौसानी एक ऊँची पहाड़ी में स्थित है, इस के एक तरफ सोमेश्वर की घाटी है और दूसरी तरफ बैजनाथ (कत्यूर) की घाटी है| जब १९२९ में महात्मा गांधी जी बागेश्वर में जनसमूह को संबोधन करने के लिए आये तो उन्होंने कौसानी के अनासक्ति आश्रम में कुछ समय बिताया| जहाँ इस समय कस्तूरबा गांधीजी का संग्रहालय है| उस समय गाँधी जी ने कौसानी को स्विट्जरलेंड ऑफ़ इंडिया का नाम दिया था| यहाँ से सूर्योदय और सूर्यास्त का का नजारा देखते ही बनता है ऐसे लगता है जैसे सारे हिमालय को सोने की चादर से ढक दिया हो|

हिंदी के मशहूर कवि सुमित्रा नंदन पन्त जी की यह जन्म स्थली है|
जहा पर उन्हों ने अपना बचपन बिताया|
पन्त जी जिस घर में पैदा हुए थे वहां अब उनका संग्रहालय बना दिया गया है|
पन्त जी जिस स्कूल में पड़ते थे वह आज भी उसी तरह चल रहा है|
आधुनिक हिन्दी साहित्य में सुमित्रानंदन पन्त जी ,छायावाद के प्रमुख स्तम्भ तथा सुकुमार कवि के रूप में प्रसिद्ध है।

सुमित्रानंदन पन्त जी जन्म २० मई ,१९०० को अल्मोडा के निकट कौसानी नामक ग्राम में हुआ था। जन्म के ६ घंटे बाद ही इनकी माता का देहांत हो गया । पन्त जी के पिता पंडित गंगादत्त पन्त धार्मिक ब्राहमण थे और कौसानी राज्य के कोषाध्यक्ष तथा बड़े जमींदार थे। आपकी प्रारंभिक शिक्षा अल्मोडा में हुई। इसके बाद काशी के जयनारायण हाई स्कूल से आपने मैट्रिक परीक्षा पास की और और उच्च शिक्षा के लिए म्योर कॉलेज इलाहाबाद में प्रवेश लिया,किंतु बाद में पढाई छोड़ दी और इसके बाद घर पर ही संस्कृत तथा बंगला का अध्ययन किया। शिक्षा काल से ही इनमे काव्य प्रतिभा जागृत हो गई थी और कविताये रचा करते थे। कालांतर में इनका परिचय सरोजनी नायडू ,रविंद्रनाथ ठाकुर तथा अंग्रेजी की रोमांटिक कविता से हुआ।
सन १९५० में आप आल इंडिया रेडियो के परामर्शदाता के पद पर नियुक्त हुए और उसके बाद सात बर्षो तक प्रत्यक्ष रूप से रेडियो से सम्बद्ध रहे । आपको “कला और बूढा चाँद” पर साहित्य अकादमी पुरस्कार ,”लोकायतन” पर सोबियत भूमि नेहरू पुरस्कार तथा “चिदंबरा” पर “भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार” प्राप्त हुआ। भारत सरकार ने आपको पद्मभूषण की उपाधि से अलंकृत किया। माँ भारती का यह अमर गायक २८ दिसंबर ,१९७७ को इस संसार से बिदा हो गया।

कौसानी में एक लक्ष्मी आश्रम (सरला देवी आश्रम) भी है| जो बस स्टेशन से १ की: मी: की दूरी पर स्थित है| यह आश्रम एक अंग्रेज औरत ने बनाया था जो लन्दन की मूल निवासी थी| जिस का नाम कैथरीन मेरी हेल्व्मन था| वह जब १९४८ में हिंदुस्तान घूमने आई तो गाँधी जी से प्रभावित होकर हिंदुस्तान में ही रह गयी| कौसानी को उन्हों ने अपने करम स्थली के रूप में चुना| यहाँ उन्हों ने लक्ष्मी आश्रम के नाम से एक बोर्डिंग स्कूल चलाया जिस में लड़कियों को सिलाई कढ़ाई बुनाई आदि सिखाया जाता है| श्री कृष्ण जन्मा अष्टमी को यहाँ बहुत भारी मेला लगता है|

कौसानी में एक उत्तराखंड टी इस्टेट ( चाय का बागान ) भी है जो कौसानी से ६ की:मी: की दूरी पर बैजनाथ की तरफ को है| यहाँ की चाय काफी खुशबूदार होती है| यहाँ की चाय विदेशो को जाती है जिसकी विदेशों में काफी मांग है| आम तुलना में यहाँ की चाय की कीमत बहुत ज्यादा है|
 बाकीं विस्तार से जानकारी आगे आपको मिलती रहेगी आपका सहयोग बहुत ही सराहनीय रहेगा|

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इतिहास

प्राचीन अल्मोड़ा कस्बा, अपनी स्थापना से पहले कत्यूरी राजा बैचल्देओ के अधीन था। उस राजा ने अपनी धरती का एक बड़ा भाग एक गुजराती ब्राह्मण श्री चांद तिवारी को दान दे दिया। बाद में जब बारामण्डल चांद साम्राज्य का गठन हुआ, तब कल्याण चंद द्वारा १५६८ में अल्मोड़ा कस्बे की स्थापना इस केन्द्रीय स्थान पर की गई। कल्याण चंद द्वारा चंद राजाओं के समय मे इसे राजपुर कहा जाता था। 'राजपुर' नाम का बहुत सी प्राचीन ताँबे की प्लेटों पर भी उल्लेख मिला है।

६० के दशक में बागेश्वर जिले और चम्पावत जिले नहीं बनें थे और अल्मोड़ा जिले के ही भाग थे।

भूगोल

अल्मोड़ा कस्बा पहाड़ पर घोड़े की काठीनुमा आकार के रिज पर बसा हुआ है। रिज के पूर्वी भाग को तालिफत और पश्चिमी भाग को सेलिफत के नाम से जाना जाता है। यहाँ का स्थानीय बाज़ार रिज की चोटी पर स्थित है जहाँ पर तालिफत और सेलिफत संयुक्त रूप से समाप्त होते हैं।

बाज़ार २.०१ किमी लम्बा है और पत्थर की पटियों से से ढका हुआ है। जहाँ पर अभी छावनी है, वह स्थान पहले लालमंडी नाम से जाना जाता था। वर्तमान में जहाँ पर कलक्टरी स्थित है, वहाँ पर चंद राजाओं का 'मल्ला महल' स्थित था। वर्तमान में जहाँ पर जिला अस्पताल है, वहाँ पर चंद राजाओं का 'तल्ला महल' हुआ करता था।

सिमलखेत नामक एक ग्राम अल्मोड़ा और चमोली की सीमा पर स्थित है। इस ग्राम के लोग कुमाँऊनी और गढ़वाली दोनो भाषाएँ बोल सकते हैं। पहाड़ की चोटी पर एक मंदिर है, भैरव गढ़ी।

गोरी नदी अल्मोड़ा जिले से होकर बहती है।


अल्मोड़ा जिले का खत्याड़ी कस्बा

अल्मोड़ा में एक प्रसिद्ध नृत्य अकादमी है, डांसीउस - जहाँ बहुत से भारतीय और फ्रांसीसी नर्तकों को प्रक्षिक्षण दिया गया था। इसकी स्थापना उदय शंकर द्वारा १९३८ में की गई थी। अल्मोड़ा नृत्य अकादमी को कस्बे के बाहर रानीधारा नामक स्थान पर गृहीत किया गया। इस स्थान पर से हिमालय और पूरे अल्मोड़ा कस्बे का शानदार दृश्य दिखाई देता है।

"इन पहाड़ों पर, प्रकृति के आतिथ्य के आगे मनुष्य द्वारा कुछ भी किया जाना बहुत छोटा हो जाता है। यहाँ हिमालय की मनमोहक सुंदरता, प्राणपोषक मौसम, और आरामदायक हरियाली जो आपके चारों ओर होती है, के बाद किसी और चीज़ की इच्छा नहीं रह जाती। मैं बड़े आश्चर्य के साथ ये सोचता हूँ की क्या विश्व में कोई और ऐसा स्थान है जो यहाँ की दृश्यावली और मौसम की बराबरी भी कर सकता है, इसे पछाड़ना तो दूर की बात है। यहाँ अल्मोड़ा में तीन सप्ताह रहने के बात मैं पहले से अधिक आश्चर्यचकित हूँ की हमारे देश के लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए यूरोप क्यों जाते है।" - महात्मा गांधी

२००१ की भारतीय जनगणना के अनुसार, अल्मोड़ा जिले की जनसंख्या ६,३०,५६७ है।

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