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आइये, जाने, समझें और जुडें अपने पहाड़ से, अपने उत्तराखण्ड से, अपने अल्मोड़ा से . . .

अल्मोड़ा एक नज़र . . .


"अल्मोड़ा भारतीय राज्य अल्मोड़ा जिला का मुख्यालय है। अल्मोड़ा अपनी सांस्कृतिक विरासत, हस्तकला, खानपान, और वन्य जीवन के लिए प्रसिद्ध है।
हल्द्वानी, काठगोदाम और नैनीताल से नियमित बसें अल्मोड़ा जाने के लिए चलती हैं। ये सभी बसे भुवाली होकर जाती हैं। भुवाली से अल्मोड़ा जाने के लिए रामगढ़, मुक्तेश्वर वाला मार्ग भी है। परन्तु अधिकांश लोग गरमपानी के मार्ग से जाना ही अदिक उत्तम समझते हैं। क्योंकि यह मार्ग काफी सुन्दर तथा नजदीकी मार्ग है।भुवाली, हल्द्वानी से ४० कि.मी. काठगोदाम से ३५ कि.मी. और नैनीताल से ११ कि.मी. की दूरी पर स्थित है। तथा भुवाली से अल्मोड़ा ५५ कि.मी. की दूरी पर बसा हुआ है।"

बुधवार, 11 मई 2011

अल्मोड़ा के फल, अल्मोड़ा में फलो का बाज़ार , फल इत्यादि


मेरे प्यारे मित्रो आज में आपको अल्मोड़ा जिले के कुछ प्रमुख फलो से वाकिफ कराना चाहूँगा।
जब ऊंचे-नीचे पथरीले रास्तों पर दौड़ लगाते हुए हम काफल, हिसालू और किलमोड़ी खाने रुक जाते थे।

अल्मोड़ा की धरती में विभिन्न प्रकार के पेड़, पौधे, फल, फूल व वनस्पतियां हैं। सभी का अपना-अपना महत्व है। उनमें से कुछ ख़ास जितनी भी प्रजातिया मैंने देखी है आपके सम्मुख प्रस्तुत कर रहा हूँ।


पूलम ( आलू बुखारा ) ( PLUM ) -  प्लम आड़ू, चेरी, बादाम एक ही जाति में आतें हैं। शरीर को तरोताजा रखने के लियें यह फल बहुत उपयोगी है । अन्य फल फसलो की तरह अधिकांशतया ठन्डे इलाको में
इसकी पैदावार ज्यादा होती है। प्लम का पेड़ 5m से ७m तक बढ़ता है. यह ऊचा हरा भरा रहता है , इसमें सफेद फूल खिलें रहते है, है मधुमक्खियों अपना छत्ता भी अक्सर इस पेड़ में बनाया करती है और शरद ऋतु आने पर यह अपने पत्ते खो देता है। कार्बोहाईड्रेट और विटामिन C की प्रचुर मात्रा इसमें पायी  जाती है।

आडू (Aadu, Peach) - आड़ू को सतालू और पीच नाम से जानते हैं। आड़ू के ताजे फल खाए जाते हैं तथा इन फलों से जैम, जेली और चटनी बनाई जाती है।आड़ू स्वाद में मीठा और हल्का खटटा एवं रसीला फल है। इसका रंग भूरा और लालीमा लिए पीला होता है।
आडू़ पौष्टिक तत्वों से युक्त आड़ू में जल की प्रचुर मात्रा होती है। इसमें लौह तत्व और पोटैशियम अधिक मात्रा में होता है। विटामिन ए, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर,फोलेट, तत्व होते हैं। इसके अलावा आड़ू में कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट पाये जाते हैं। जैसे विटामिन सी, केरेटोनोइड्स, बाइलेवोनोइड्स और फाइटोकैमिकल्स, जो सेहत के लिए लाभदायक होते हैं।
फलों को आहार में लेना स्वस्थ्य के लिए उत्तम होता है।  फलों का जूस प्यास बुझाने के साथ-साथ शरीर के लिए लाभदायक होता है।  रोजाना ताजे फलों का जूस पीने से सेहत अच्छी रहती है.ऐसा ही फल आडू़ है। इसके जूस में मौजूद विटामिन, खनिज और एंजाइम्स बीमारियों से लड़ने और शरीर को चुस्त रखने में महत्वपूर्ण योगदान निभाते हैं।
आडू़ का नियमित सेवन करने से कब्ज दूर होती है। आड़ू खाने से खून साफ होता है तथा त्वचा में निखार आता है। यह हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसके सेवन से काया निरोगी बनती है।


खुमानी ( Apricot ) - खुबानी के लिए चीन से मूल रूप से माना जाता है। फल यूरोप में अमेरिका द्वारा पेश किया गया था। खुबानी शहद की तरह एक स्वादिष्ट फल है, आदर्श खूबानी को थोड़ा बनावट में नरम किया जाना चाहिए. एक यह एक बंद कागज की थैली में रखकर फल पकाना और यह कमरे के तापमान पर छोड़ सकते हैं.

नाशपाती ( पार ) -
गड़म्योह -
सेव ( Apple ) -
अंगूर ( Grape ) -
किलमोड़ी -
हिसालू -
म्योह -
बेडू - 
काकू ( Cherry Tomato ) -
काफल -
जामुन -
आम -
पहाड़ी केले -
बेल -
गन्ना -
चूख (बड़ा नींबू- Citrus Lirmon ) -
नींबू जँभीरा (जामिर- Citrus Sinensis ) -
माल्टा (Citrus Hystrix ) -
संतरा (Citrus Reticulata ) -
दाड़िम (Punica Granatum ) -
जंगली फलों में किनगोर, बेल, घिंगारू, काफल, हिंसुल, तिमला, सेमल, लिंगड़ा, खैणा व दय्या मुख्य रूप से हैं।
इन बीमारियों में कारगर हैं जंगली फल
फल                   बीमारियां
काफल श्वास, बुखार व पेचिस
बेल पाचन, कैंसर व हृदयरोग
किनगोर पेट, त्वचा संबंधी बीमारियां
सेमल कटने पर उपचार
लिंगड़ा पीलिया
दैय्या जलने में कारगर
अगर आप इन फलो के बारें में कुछ खास जानतें है तो आप अपने लेख को मेरी पोस्ट के साथ में जोड़ सकते है।

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इतिहास

प्राचीन अल्मोड़ा कस्बा, अपनी स्थापना से पहले कत्यूरी राजा बैचल्देओ के अधीन था। उस राजा ने अपनी धरती का एक बड़ा भाग एक गुजराती ब्राह्मण श्री चांद तिवारी को दान दे दिया। बाद में जब बारामण्डल चांद साम्राज्य का गठन हुआ, तब कल्याण चंद द्वारा १५६८ में अल्मोड़ा कस्बे की स्थापना इस केन्द्रीय स्थान पर की गई। कल्याण चंद द्वारा चंद राजाओं के समय मे इसे राजपुर कहा जाता था। 'राजपुर' नाम का बहुत सी प्राचीन ताँबे की प्लेटों पर भी उल्लेख मिला है।

६० के दशक में बागेश्वर जिले और चम्पावत जिले नहीं बनें थे और अल्मोड़ा जिले के ही भाग थे।

भूगोल

अल्मोड़ा कस्बा पहाड़ पर घोड़े की काठीनुमा आकार के रिज पर बसा हुआ है। रिज के पूर्वी भाग को तालिफत और पश्चिमी भाग को सेलिफत के नाम से जाना जाता है। यहाँ का स्थानीय बाज़ार रिज की चोटी पर स्थित है जहाँ पर तालिफत और सेलिफत संयुक्त रूप से समाप्त होते हैं।

बाज़ार २.०१ किमी लम्बा है और पत्थर की पटियों से से ढका हुआ है। जहाँ पर अभी छावनी है, वह स्थान पहले लालमंडी नाम से जाना जाता था। वर्तमान में जहाँ पर कलक्टरी स्थित है, वहाँ पर चंद राजाओं का 'मल्ला महल' स्थित था। वर्तमान में जहाँ पर जिला अस्पताल है, वहाँ पर चंद राजाओं का 'तल्ला महल' हुआ करता था।

सिमलखेत नामक एक ग्राम अल्मोड़ा और चमोली की सीमा पर स्थित है। इस ग्राम के लोग कुमाँऊनी और गढ़वाली दोनो भाषाएँ बोल सकते हैं। पहाड़ की चोटी पर एक मंदिर है, भैरव गढ़ी।

गोरी नदी अल्मोड़ा जिले से होकर बहती है।


अल्मोड़ा जिले का खत्याड़ी कस्बा

अल्मोड़ा में एक प्रसिद्ध नृत्य अकादमी है, डांसीउस - जहाँ बहुत से भारतीय और फ्रांसीसी नर्तकों को प्रक्षिक्षण दिया गया था। इसकी स्थापना उदय शंकर द्वारा १९३८ में की गई थी। अल्मोड़ा नृत्य अकादमी को कस्बे के बाहर रानीधारा नामक स्थान पर गृहीत किया गया। इस स्थान पर से हिमालय और पूरे अल्मोड़ा कस्बे का शानदार दृश्य दिखाई देता है।

"इन पहाड़ों पर, प्रकृति के आतिथ्य के आगे मनुष्य द्वारा कुछ भी किया जाना बहुत छोटा हो जाता है। यहाँ हिमालय की मनमोहक सुंदरता, प्राणपोषक मौसम, और आरामदायक हरियाली जो आपके चारों ओर होती है, के बाद किसी और चीज़ की इच्छा नहीं रह जाती। मैं बड़े आश्चर्य के साथ ये सोचता हूँ की क्या विश्व में कोई और ऐसा स्थान है जो यहाँ की दृश्यावली और मौसम की बराबरी भी कर सकता है, इसे पछाड़ना तो दूर की बात है। यहाँ अल्मोड़ा में तीन सप्ताह रहने के बात मैं पहले से अधिक आश्चर्यचकित हूँ की हमारे देश के लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए यूरोप क्यों जाते है।" - महात्मा गांधी

२००१ की भारतीय जनगणना के अनुसार, अल्मोड़ा जिले की जनसंख्या ६,३०,५६७ है।

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