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आइये, जाने, समझें और जुडें अपने पहाड़ से, अपने उत्तराखण्ड से, अपने अल्मोड़ा से . . .

अल्मोड़ा एक नज़र . . .


"अल्मोड़ा भारतीय राज्य अल्मोड़ा जिला का मुख्यालय है। अल्मोड़ा अपनी सांस्कृतिक विरासत, हस्तकला, खानपान, और वन्य जीवन के लिए प्रसिद्ध है।
हल्द्वानी, काठगोदाम और नैनीताल से नियमित बसें अल्मोड़ा जाने के लिए चलती हैं। ये सभी बसे भुवाली होकर जाती हैं। भुवाली से अल्मोड़ा जाने के लिए रामगढ़, मुक्तेश्वर वाला मार्ग भी है। परन्तु अधिकांश लोग गरमपानी के मार्ग से जाना ही अदिक उत्तम समझते हैं। क्योंकि यह मार्ग काफी सुन्दर तथा नजदीकी मार्ग है।भुवाली, हल्द्वानी से ४० कि.मी. काठगोदाम से ३५ कि.मी. और नैनीताल से ११ कि.मी. की दूरी पर स्थित है। तथा भुवाली से अल्मोड़ा ५५ कि.मी. की दूरी पर बसा हुआ है।"

सोमवार, 5 सितंबर 2011

अल्मो़डा स्थित नंदा देवी मंदिर


अल्मो़डा स्थित नंदा देवी मंदिर

अल्मो़डा में आस्था और विश्वास के साथ मनाए जाने वाले नंदा देवी मेला महोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं।

अल्मोड़ा। नगर में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध नंदादेवी मेले की तैयारियां शुरू हो गई हैं। कलक्ट्रेट में हुई बैठक में जिलाधिकारी डीएस गर्ब्याल ने कहा कि ऐतिहासिक पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नंदादेवी मेले को भव्यता प्रदान करने के लिए टीम भावना से कार्य करना होगा। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए दलों को बुलाया जाए। मेले का उद्घाटन चार सितंबर को होगा। छह सितंबर को सांस्कृतिक जुलूस निकलेगा। जबकि नौ सितंबर को डोला विसर्जन के साथ मेले का समापन होगा।

डीएम ने विद्युत, टेलीफोन विभाग तथा केबल आपरेटरों को निर्देश दिए कि बाजार क्षेत्र में झूलते तारों को ठीक कर लें। पालिका, पुलिस, एसडीएम संयुक्त निरीक्षण करें, ताकि नंदादेवी डोले को ले जाने में कोई परेशान नहीं हो। विकास प्रदर्शनी के लिए महाप्रबंधक उद्योग केंद्र को समन्वयक बनाया गया। सेना के बैंड के लिए सेना के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जाए। निर्णय लिया गया कि इस वर्ष सांस्कृतिक कार्यक्रम रैमजे इंटर कालेज में होंगे। डीएम ने क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी को निर्देश दिए कि वह मेले के बारे में विस्तृत जानकारी देने के साथ ही अन्य पर्यटन क्षेत्रों के बारे में प्रचार सामग्री की उपलब्धता बनाए रखें। प्रभारी संग्रहालय से कहा कि वह मेले के लिए से स्वीकृत धनराशि के बारे में शासन से पत्राचार कर लें। छह सितंबर को सांस्कृतिक जुलूस निकलेगा जिसमें स्कूली छात्र-छात्राएं तथा सांस्कृतिक दल भाग लेंगे।

डीएम ने मेले के दौरान सफाई, बिजली, पानी आदि व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए। एसपी पूरन सिंह रावत ने कहा कि मेले में शांति व्यवस्था बनाए रखने को पुलिस मस्तैदी से कार्य करेगी। शराबियों को पकड़ने केलिए एल्कोमीटर मशीन लगाई जाएगी। संचालन एडीएम राजीव साह ने किया। बैठक में सीडीओ धीराज गर्ब्याल, प्रशिक्षु आईएएस सोनिका, एसडीएम एनएस क्वीरियाल, डीएसपी आरएस जयंत, कैप्टन गौतम सिंह, मेला कमेटी के हरीश अग्रवाल, मनोज वर्मा, दिनेश गोयल, अन्नू साह, नरेंद्र वर्मा, धन सिंह मेहता, शिरीष पांडे, मनोज सनवाल, एलके पंत, नरेंद्र वर्मा आदि उपस्थित थे।

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इतिहास

प्राचीन अल्मोड़ा कस्बा, अपनी स्थापना से पहले कत्यूरी राजा बैचल्देओ के अधीन था। उस राजा ने अपनी धरती का एक बड़ा भाग एक गुजराती ब्राह्मण श्री चांद तिवारी को दान दे दिया। बाद में जब बारामण्डल चांद साम्राज्य का गठन हुआ, तब कल्याण चंद द्वारा १५६८ में अल्मोड़ा कस्बे की स्थापना इस केन्द्रीय स्थान पर की गई। कल्याण चंद द्वारा चंद राजाओं के समय मे इसे राजपुर कहा जाता था। 'राजपुर' नाम का बहुत सी प्राचीन ताँबे की प्लेटों पर भी उल्लेख मिला है।

६० के दशक में बागेश्वर जिले और चम्पावत जिले नहीं बनें थे और अल्मोड़ा जिले के ही भाग थे।

भूगोल

अल्मोड़ा कस्बा पहाड़ पर घोड़े की काठीनुमा आकार के रिज पर बसा हुआ है। रिज के पूर्वी भाग को तालिफत और पश्चिमी भाग को सेलिफत के नाम से जाना जाता है। यहाँ का स्थानीय बाज़ार रिज की चोटी पर स्थित है जहाँ पर तालिफत और सेलिफत संयुक्त रूप से समाप्त होते हैं।

बाज़ार २.०१ किमी लम्बा है और पत्थर की पटियों से से ढका हुआ है। जहाँ पर अभी छावनी है, वह स्थान पहले लालमंडी नाम से जाना जाता था। वर्तमान में जहाँ पर कलक्टरी स्थित है, वहाँ पर चंद राजाओं का 'मल्ला महल' स्थित था। वर्तमान में जहाँ पर जिला अस्पताल है, वहाँ पर चंद राजाओं का 'तल्ला महल' हुआ करता था।

सिमलखेत नामक एक ग्राम अल्मोड़ा और चमोली की सीमा पर स्थित है। इस ग्राम के लोग कुमाँऊनी और गढ़वाली दोनो भाषाएँ बोल सकते हैं। पहाड़ की चोटी पर एक मंदिर है, भैरव गढ़ी।

गोरी नदी अल्मोड़ा जिले से होकर बहती है।


अल्मोड़ा जिले का खत्याड़ी कस्बा

अल्मोड़ा में एक प्रसिद्ध नृत्य अकादमी है, डांसीउस - जहाँ बहुत से भारतीय और फ्रांसीसी नर्तकों को प्रक्षिक्षण दिया गया था। इसकी स्थापना उदय शंकर द्वारा १९३८ में की गई थी। अल्मोड़ा नृत्य अकादमी को कस्बे के बाहर रानीधारा नामक स्थान पर गृहीत किया गया। इस स्थान पर से हिमालय और पूरे अल्मोड़ा कस्बे का शानदार दृश्य दिखाई देता है।

"इन पहाड़ों पर, प्रकृति के आतिथ्य के आगे मनुष्य द्वारा कुछ भी किया जाना बहुत छोटा हो जाता है। यहाँ हिमालय की मनमोहक सुंदरता, प्राणपोषक मौसम, और आरामदायक हरियाली जो आपके चारों ओर होती है, के बाद किसी और चीज़ की इच्छा नहीं रह जाती। मैं बड़े आश्चर्य के साथ ये सोचता हूँ की क्या विश्व में कोई और ऐसा स्थान है जो यहाँ की दृश्यावली और मौसम की बराबरी भी कर सकता है, इसे पछाड़ना तो दूर की बात है। यहाँ अल्मोड़ा में तीन सप्ताह रहने के बात मैं पहले से अधिक आश्चर्यचकित हूँ की हमारे देश के लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए यूरोप क्यों जाते है।" - महात्मा गांधी

२००१ की भारतीय जनगणना के अनुसार, अल्मोड़ा जिले की जनसंख्या ६,३०,५६७ है।

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