गैलरी

Gallery

  • Scenary
  • Scenary
  • Scenary
  • Scenary
  • Scenary
  • Scenary
  • Scenary
  • Scenary
Scenary1 Scenary2 Scenary3 Scenary4 Scenary5 Scenary6 Scenary7 Scenary8

आइये, जाने, समझें और जुडें अपने पहाड़ से, अपने उत्तराखण्ड से, अपने अल्मोड़ा से . . .

अल्मोड़ा एक नज़र . . .


"अल्मोड़ा भारतीय राज्य अल्मोड़ा जिला का मुख्यालय है। अल्मोड़ा अपनी सांस्कृतिक विरासत, हस्तकला, खानपान, और वन्य जीवन के लिए प्रसिद्ध है।
हल्द्वानी, काठगोदाम और नैनीताल से नियमित बसें अल्मोड़ा जाने के लिए चलती हैं। ये सभी बसे भुवाली होकर जाती हैं। भुवाली से अल्मोड़ा जाने के लिए रामगढ़, मुक्तेश्वर वाला मार्ग भी है। परन्तु अधिकांश लोग गरमपानी के मार्ग से जाना ही अदिक उत्तम समझते हैं। क्योंकि यह मार्ग काफी सुन्दर तथा नजदीकी मार्ग है।भुवाली, हल्द्वानी से ४० कि.मी. काठगोदाम से ३५ कि.मी. और नैनीताल से ११ कि.मी. की दूरी पर स्थित है। तथा भुवाली से अल्मोड़ा ५५ कि.मी. की दूरी पर बसा हुआ है।"

शुक्रवार, 1 जनवरी 2010

नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएं

आपको और आपके परिवार को नव संवत्सर 2067 व नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएं.

असुरो के अत्याचारों से देवता बड़े दुखी त्रसित थे. देवताओं को ब्रम्हा जी ने बताया की असुरराज की मृत्यु किसी कुँआरी कन्या के हाथो से होगी . समस्त देवताओं के शक्ति तेज प्रताप से जगतजननी की उत्पत्ति हुई. देवी का मुख भगवान शंकर के तेज से हुआ . यमराज के तेज से मस्तक और केश, विष्णु के तेज से भुजाये, चंद्रमा के तेज से स्तन, इन्द्र के तेज से कमर और वरुण के तेज से जंघा पृथ्वी के तेज से नितम्ब, ब्रम्हा के तेज से चरण, सूर्य के तेज से दोनों पोरों की अंगुलियां, प्रजापति के तेज से दांत, अग्नि के तेज से दोनों नेत्र, संध्या के तेज से भौहे, वायु के तेज से कान और देवताओं के तेज से देवी के भिन्न भिन्न अंग बने.

महाशक्ति को शिवाजी ने त्रिशूल, लक्ष्मी ने कमल का फूल, विष्णु ने चक्र, अग्नि ने शक्ति और वाणों के तरकश, प्रजापति ने स्फटिक की माला, वरुण ने दिव्य शंख, हनुमान ने गदा, इन्द्र ने वज्र, भगवान राम ने धनुष बाण, वरुणदेव ने पाश और वाण, ब्रम्हाजी ने चारो वेद, हिमालय पर्वत ने सवारी करने के लिए सिह दिया और इसके अतिरिक्त समुंद्र ने उज्जवल हार, चूडामणि ,दो कुंडल, पैरो के नुपुर और ढेरो अंगूठियाँ माँ को भैट किये . इन सभी वस्तुओ को माँ जगदम्बे भवानी ने अपने अठारह हाथो में धारण किया. माँ दुर्गा इस धरा की आद्य शक्ति है अर्थात आदिशक्ति है.

पितामह ब्रम्हा भगवान विष्णु और भगवान शंकर उन्ही की शक्ति से स्रष्टि का की उत्पत्ति पालन और पोषण और संहार करते है अन्य देवता भी उन्ही की शक्ति से उर्जाकृत होकर कार्य करते है. नवरात्रि पर्व के प्रथम दिन माँ दुर्गा के प्रथम रूप शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है उन्होंने हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया था इसीलिए इन्हें शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है. इनका वाहन वृषभ है, इनके बाए हाथ में कमल है और दांये हाथ में त्रिशूल होता है इन्हें सती के नाम से भी जाना जाता है. एक बार दक्ष प्रजापति ने एक यज्ञ किया जिसमे भगवान शंकर को नहीं बाला गया था.

सती यज्ञ में जाने के लिए बैचेन थी. भगवान को नहीं बुलाया गया था तो वे नहीं गए पर उन्होंने सती को यज्ञ में जाने दिया. उनकी बहिनों ने उनका तिरस्कार किया और खूब सती का उपहास उड़ाया उनके पिता ने भी उन्हें अपमानजनक शब्द कहे. वे अपने पति का अपमान नहीं सह सकी और उन्होंने स्वयं को योगाग्नि द्वारा भस्म कर लिया इससे दुखित होकर भगवान शंकर ने उस यज्ञ का विध्वंस कर दिया. इन्ही सती ने अगले जन्म में शैलराज हिमालय के यहाँ जन्म लिया और शैलपुत्री कहलाई. इनका महत्त्व और शक्ति अनंत है.

ॐ दुर्गा देव्यो नमः
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता नमोस्तुते नमोस्तुते नमो नमः

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

इतिहास

प्राचीन अल्मोड़ा कस्बा, अपनी स्थापना से पहले कत्यूरी राजा बैचल्देओ के अधीन था। उस राजा ने अपनी धरती का एक बड़ा भाग एक गुजराती ब्राह्मण श्री चांद तिवारी को दान दे दिया। बाद में जब बारामण्डल चांद साम्राज्य का गठन हुआ, तब कल्याण चंद द्वारा १५६८ में अल्मोड़ा कस्बे की स्थापना इस केन्द्रीय स्थान पर की गई। कल्याण चंद द्वारा चंद राजाओं के समय मे इसे राजपुर कहा जाता था। 'राजपुर' नाम का बहुत सी प्राचीन ताँबे की प्लेटों पर भी उल्लेख मिला है।

६० के दशक में बागेश्वर जिले और चम्पावत जिले नहीं बनें थे और अल्मोड़ा जिले के ही भाग थे।

भूगोल

अल्मोड़ा कस्बा पहाड़ पर घोड़े की काठीनुमा आकार के रिज पर बसा हुआ है। रिज के पूर्वी भाग को तालिफत और पश्चिमी भाग को सेलिफत के नाम से जाना जाता है। यहाँ का स्थानीय बाज़ार रिज की चोटी पर स्थित है जहाँ पर तालिफत और सेलिफत संयुक्त रूप से समाप्त होते हैं।

बाज़ार २.०१ किमी लम्बा है और पत्थर की पटियों से से ढका हुआ है। जहाँ पर अभी छावनी है, वह स्थान पहले लालमंडी नाम से जाना जाता था। वर्तमान में जहाँ पर कलक्टरी स्थित है, वहाँ पर चंद राजाओं का 'मल्ला महल' स्थित था। वर्तमान में जहाँ पर जिला अस्पताल है, वहाँ पर चंद राजाओं का 'तल्ला महल' हुआ करता था।

सिमलखेत नामक एक ग्राम अल्मोड़ा और चमोली की सीमा पर स्थित है। इस ग्राम के लोग कुमाँऊनी और गढ़वाली दोनो भाषाएँ बोल सकते हैं। पहाड़ की चोटी पर एक मंदिर है, भैरव गढ़ी।

गोरी नदी अल्मोड़ा जिले से होकर बहती है।


अल्मोड़ा जिले का खत्याड़ी कस्बा

अल्मोड़ा में एक प्रसिद्ध नृत्य अकादमी है, डांसीउस - जहाँ बहुत से भारतीय और फ्रांसीसी नर्तकों को प्रक्षिक्षण दिया गया था। इसकी स्थापना उदय शंकर द्वारा १९३८ में की गई थी। अल्मोड़ा नृत्य अकादमी को कस्बे के बाहर रानीधारा नामक स्थान पर गृहीत किया गया। इस स्थान पर से हिमालय और पूरे अल्मोड़ा कस्बे का शानदार दृश्य दिखाई देता है।

"इन पहाड़ों पर, प्रकृति के आतिथ्य के आगे मनुष्य द्वारा कुछ भी किया जाना बहुत छोटा हो जाता है। यहाँ हिमालय की मनमोहक सुंदरता, प्राणपोषक मौसम, और आरामदायक हरियाली जो आपके चारों ओर होती है, के बाद किसी और चीज़ की इच्छा नहीं रह जाती। मैं बड़े आश्चर्य के साथ ये सोचता हूँ की क्या विश्व में कोई और ऐसा स्थान है जो यहाँ की दृश्यावली और मौसम की बराबरी भी कर सकता है, इसे पछाड़ना तो दूर की बात है। यहाँ अल्मोड़ा में तीन सप्ताह रहने के बात मैं पहले से अधिक आश्चर्यचकित हूँ की हमारे देश के लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए यूरोप क्यों जाते है।" - महात्मा गांधी

२००१ की भारतीय जनगणना के अनुसार, अल्मोड़ा जिले की जनसंख्या ६,३०,५६७ है।

लोकप्रिय पोस्ट